Monday, April 20, 2009

जानिए कि आप Advani @ Campus कार्यक्रम में कैसे योगदान दे सकते हैं?


आज के कठिन समय में परिस्थितियों का सामना करने और जरूरत पड़ने पर सही और ठोस निर्णय लेने के लिए एक सशक्त और अनुभवी नेता की जरूरत है। वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य में, भारतीय जनता पार्टी/राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबन्धन की ओर से प्रधानमंत्री पद के प्रत्याशी श्री लालकृष्ण आडवाणी का सत्यनिष्ठा, राजनीतिक अनुभव, सामाजिक नेतृत्व और प्रशासनिक कुशाग्रबुध्दि में कोई भी मुकाबला नहीं कर सकता।

कार्यक्रम का लक्ष्य

Advani @ Campus लालकृष्ण आडवाणी कम्यूनिकेशन ऑफिस द्वारा शुरू किया गया एक निचले स्तर का कार्यक्रम है जिसका उद्देश्य देशभर के कॉलेज परिसरों के युवा मतदाताओं से सम्पर्क करना और उन्हें जुटाना है। योजना के अनुसार, युवा अभियानकर्ता (कम्पेनर्स) कॉलेजों में जायेंगे और राष्ट्र के समक्ष खड़े महत्वपूर्ण मुद्दों और भारत के युवाओं के लिए आडवाणीजी की योजनाओं पर छात्र समुदाय से बातचीत करेंगे।

हमें आपकी जरूरत है

Advani @ Campus को विभिन्न क्षेत्रों और शैक्षणिक/व्यावसायिक पृष्ठभूमि वाले दो श्रेणियों के अभियानकर्ताओं की जरूरत है :

(क) प्रस्तुतीकर्ता (Presenter)

(ख) आयोजक (Organisers)

जैसाकि नाम दिया गया है, प्रस्तुतीकर्ता वह व्यक्ति होता है जो वास्तव में छात्र समुदाय से ''बातचीत करने'' का काम करता है। दूसरी ओर, आयोजक वह व्यक्ति होता है जो कॉलेज प्राधिकारियों या छात्र समुदायों से बात करके उनके लिए प्रस्तुतीकरण के लिए समय निर्धारित कराता है। कोई भी व्यक्ति प्रस्तुतीकर्ता या आयोजक किसी एक अथवा दोनों व्यक्तियों की भूमिका निभा सकता है।

हमसे सम्पर्क करें

यदि आप अपने शहर में Advani @ Campus कार्यक्रम आयोजित कराना चाहते हैं अथवा प्रस्तुतीकर्ता (Presenter) या आयोजक (Organiser) बनना चाहते हैं या दोनों बनना चाहते हैं तो कृपया हमें निम्नलिखित पते पर लिखें :

Advani @ Campus प्रोग्राम
एल.के. आडवाणी कम्युनिकेशन्स ऑफिस
26, तुगलक क्रिसेंट
तुगलक रोड़ पर,
नई दिल्ली-110011

टेलीफोन : 011-23001700

ई-मेल : join.advaniatcampus@bjp.orgThis e-mail address is being protected from spam bots, you need JavaScript enabled to view it

वेब : http://www.lkadvani.in


अडवाणी @ कैम्पस

आज के कठिन दौर में सही और जरूरत पड़ने पर कठोर निर्णय लेने के लिए एक सशक्त और अनुभवी नेता की जरूरत है। वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य में, भारतीय जनता पार्टी/राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबन्धन की ओर से प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार श्री लालकृष्ण आडवाणी का सत्यनिष्ठा, राजनीतिक अनुभव, सामाजिक नेतृत्व और प्रशासनिक कुशाग्रबुध्दि में कोई भी मुकाबला नहीं कर सकता।

Advani @ Campus कार्यक्रम एक निचले स्तर के अभियान के रूप में तैयार किया गया है जिसका उद्देश्य देशभर के हजारों कॉलेज परिसरों के युवा मतदाताओं से सम्पर्क करना और उन्हें जुटाना है। कार्यक्रम के डिजाइन के रूप में, हजारों युवा अभियानकर्ता - जो विभिन्न कैम्पसों में छात्रों के रूप में उसी शैक्षिक और व्यावसायिक पृष्ठभूमि से जुड़े हुए हैं - लगभग 5000 कॉलेजों में प्रचार करेंगे और राष्ट्र के समक्ष खड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर छात्र समुदाय से बातचीत करेंगे। वे सुशासन, विकास और सुरक्षा के लिए श्री आडवाणी के एजेंडा के रूप में भारत के युवाओं को उनके दृष्टिकोण और विचारों से भी अवगत करायेंगे।

Advani @ Campus एक ऐसा अभियान है जिसका लक्ष्य परिवर्तन लाने के लिए छात्र समुदाय की आवाज को जुटाना है। भारत का शासन जिस तरह से चलाया जा रहा है, उसमें एक बड़ा परिवर्तन लाना। यह परिवर्तन निम्नलिखित बातों में लाया जाएगा

 रोजगार के अवसरों में व्यापक वृध्दि करते हुए अर्थव्यवस्था में बदलाव लाने हेतु महत्वाकांक्षी पहलें।
 मानव विकास सूचकांक में विश्व स्तर पर भारत के रेंक को 128 से बढ़ाकर शीर्ष 10 पर लाने का संकल्प।
 सुशासन सम्बन्धी दूरगामी सुधार।
 सभी के लिए न्याय, तुष्टिकरण किसी का नहीं।
 आतंकवाद पर अंकुश लगाने हेतु 'बिल्कुल बर्दाश्त नहीं' वाली नीति।

Advani @ Campus एक राष्ट्रव्यापी पहल है

  • आपके विचार सुनने हेतु ताकि उन्हें शासन के हमारे भावी एजेंडा में सम्मिलित किया जा सके।
  • अभियान में भाग लेने हेतु और परिवर्तन का अभिकर्ता (एजेंट) बनने के लिए आपको आमंत्रित करने हेतु।
विज़िट अस @ ---- www.lkadvani.in , www.bjp.org
धौनी के भाई हो गए भाजपाई
Apr 20, 4:07 pm

रांची [जागरण संवाददाता]। भाजपा ने भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान महेंद्र सिंह धौनी के बड़े भाई नरेंद्र सिंह धौनी को शामिल किया है। रविवार को एक सादे समारोह में उन्होंने भाजपा के प्रदेश कार्यालय में पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। पत्रकारों से उन्होंने कहा कि उनका परिवार और वह स्वयं भाजपा के पुराने समर्थक हैं। जब उनसे पूछा गया कि माही को इस संबंध में जानकारी है या नहीं, इस सवाल पर उन्होंने कहा कि यह बात ज्यादा अहम नहीं है। क्योंकि माही उनसे छोटा है। वह गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के कामों से काफी प्रभावित हैं। नरेंद्र सिंह धौनी ने कहा कि उनका सपना है कि झारखंड भी गुजरात जैसा विकसित राज्य बने। इसके लिए भाजपा ही उपयुक्त राजनैतिक दल है। देश को भी लालकृष्ण आडवाणी जैसा लौहपुरुष का नेतृत्व चाहिए। तभी देश सुरक्षित, संरक्षित और संव‌िर्द्धत होगा। उन्हें इस बात पर गर्व है कि वह क्रांतिवीर बिरसा मुंडा की धरती पर जन्मे हैं।

'Grand temple in Ayodhya'

Grand temple in Ayodhya'

Lucknow, April 20. A grand Ram temple in Ayodhya will become a reality if the Bharatiya Janata Party is voted to power, BJP prime ministerial candidate L.K. Advani told an election rally here Sunday.

"It is a dream of crores of people across India and a magnificent temple will definitely come up in Ayodhya," Advani told a gathering of over a thousand people.

Advani was in this Uttar Pradesh capital to campaign for party candidate Lalji Tandon, the sitting legislator.

He also repeated his pledge to bring back the Indian money deposited in tax havens abroad if voted to power.

"A party of south India has protested the demolition of the Rama Setu and has supported the cause of building the Ram mandir in Ayodhya. The party has mentioned this in its election manifesto too," Advani said, hinting at J. Jayalalitha's AIADMK.

He also cautioned party workers against over-confidence and said that was what led to the BJP's defeat in the 2004 elections.

"I would like to request party workers not to rely on rallies and public meetings. We have 10 crore new voters this time and you should be conducting door-to-door contacts to convince them," Advani said in his hour-long speech in Vikas Nagar locality.

Sunday, April 19, 2009

लाडली लक्ष्मी योजना : हम इसका राष्ट्रव्यापी कार्यान्वयन करेंगे और भारत की हर बच्ची को ”लखपति” बनायेंगे .


हाल ही में अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस (8 मार्च) के अवसर पर मेरी टीम ने जिस रचनात्मक तरीके से वेबसाइट पर शुभकामना संदेश दिया था, उसे लोगों ने काफी सराहा। सामान्य तौर पर दिखाए जाने वाले बैनर के बदले तीन स्क्रीन बारी-बारी से दिखाए गए। पहला, ‘नारी तुम श्रध्दा हो’ दूसरा ‘नारी तुम संस्कार हो’ और तीसरा ‘नारी तुम शक्ति हो’। यह विचार प्रसिध्द हिन्दी कवि श्री जयशंकर प्रसाद की कविता से प्रेरित था-

नारी! तुम केवल श्रध्दा हो,
विश्वास-रजत-नग पल तल में,
पीयूष श्रोत सी बहा करो
जीवन की सुन्दर समतल में

‘श्रध्दा’, ‘संस्कार’ और ‘शक्ति’ ये तीन शब्द नारी और विशेषकर भारतीय नारी के गुणों की बखूबी व्याख्या करते हैं। लेकिन फिर भी भारतीय नारी के विकास से जुड़े आंकड़ों को देखकर मुझे बहुत तकलीफ होती है।

• महिला के जीवन की संभावित औसत दर : 64.6 वर्ष
• शिशु मृत्यु दर : प्रति 1000 जीवित शिशुओं में 57 प्रतिशत
• 53 प्रतिशत महिलाओं ने किसी कुशल स्वास्थ्यकर्मी की मदद के बिना शिशुओं को जन्म दिया
• मातृ मृत्युदर : प्रति एक लाख बच्चों के जन्म पर 301
• एक लाख महिलाओं को तपेदिक के कारण घर से निकाला गया
• महिला साक्षरता दर : 47.8 प्रतिशत (विश्व में आखिरी पांचवा हिस्सा)
• 6 करोड़ अल्प कुपोषण वाले बच्चे और 80 लाख भयंकर कुपोषण से पीड़ित बच्चे (उनमें लड़कों की अपेक्षा लड़कियां ज्यादा)

मुझे जो बात सबसे ज्यादा परेशान करती है वह है - भारत में पुरूष और स्त्री के बीच जनसंख्या अन्तर, पुरूष (1000) और महिला (933)। यह स्थिति हरियाणा और पंजाब जैसे राज्यों में ज्यादा गंभीर है। प्रतिवर्ष लगभग 20 लाख कन्या भ्रूण वाली माताओं का गर्भपात करा दिया जाता है। हमारे यहां जन्म से पहले शिशु के लिंग की जांच करवाने के खिलाफ कड़े नियम हैं परन्तु सिर्फ कानून होना ही पर्याप्त नहीं है। पिछले वर्ष जब ”बेटी बचाओ” संस्था के कार्यकर्ता मुझसे मिले थे तो मैंने कहा था, ”भ्रूण हत्या जैसे घिनौने कृत्य के खिलाफ सरकारी एंव गैर-सरकारी संगठनों के प्रयासों को मिलाते हुए एक राष्ट्रीय अभियान चलाने की जरूरत है।” अगर भारतीय जनता पार्टी और एनडीए को आगामी लोकसभा चुनावों में जनादेश मिलता है तो मैं सरकार के मुखिया के नाते खुद इस अभियान का नेतृत्व करूंगा।

घरों में बालिकाओं के खिलाफ हो रहे भेदभाव का प्रमुख कारण गरीबी है। यही कारण है कि आज भी बालिकाओं की साक्षरता दर कम है और अधिकतर लड़कियां बीच में ही अपनी पढ़ाई छोड़ देती हैं। मैंने अपनी देशभर की यात्राओं के दौरान अक्सर छोटी उम्र की लड़कियों जिन्हें विद्यालयों में पढ़ते और खेलते हुए होना चाहिए, को लकड़ियों का बोझ सिर पर ढोते हुए देखा है। भारत सरकार एवं राज्य सरकारों की यह नैतिक र् कत्तव्य और लोकतांत्रिक जिम्मेदारी है कि वे नारी के खिलाफ इस असंतुलन को दूर करने और विकास के हर क्षेत्र में महिलाओं के विकास के लिए बराबर के अवसर उपलब्ध कराने के प्रयास करें।

इस सन्दर्भ में, मैं मध्य प्रदेश की भाजपा सरकार द्वारा 2006 में कार्यान्वित की गई ”लाडली लक्ष्मी योजना” की सराहना करता हूं। यह योजना बहुत ही कम समय में मध्य प्रदेश राज्य के इतिहास में अत्यधिक सफल समाज कल्याण् योजनाओं में से एक सिध्द हुई है। इसका श्रेय मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान को जाता है जिनकी राजनीतिक इच्छा-शक्ति और लगातार निजी ध्यान देने से ही यह संभव हो पाया है। ”लाडली लक्ष्मी योजना” का मुख्य उद्देश्य है-लड़कियों का विद्यालयों से नाम कटवाने की प्रवृत्ति को बंद करना और उन्हें कम से कम कॉलेज में जाने से पूर्व तक की पढ़ाई पूरी करने के लिए प्रोत्साहित करना। इस योजना के अन्तर्गत राज्य सरकार परिवार में पैदा हुई हर लड़की के लिए पांच वर्ष तक प्रतिवर्ष 6000 रूपये के बचत-पत्र (Saving Certificate) खरीदती है। पांचवी कक्षा की पढ़ाई पूरी करने के उपरान्त लड़की को 2000 रूपये, आठवीं कक्षा पूरी करने पर 4,000 रूपये और दसवीं कक्षा के बाद 7500 रूपये दिए जाते हैं। ग्यारहवीं कक्षा के दौरान छात्रा को प्रति मास 200 रूपये की राशि दी जाती है; और बारहवीं कक्षा में प्रवेश लेने पर अथवा 18 वर्ष की आयु पूरी करने पर उसे 1,18,000 रूपये की एकमुश्त रकम दी जाती है।

मेरा यह वादा है कि यदि एनडीए को सरकार बनाने का जनादेश मिलता है तो हम हर राज्य में ”लाडली लक्ष्मी योजना” को कार्यान्वित करेंगे। भारत में हर लाडली जब बालिग बनेगी और जीवन के नये चरण में कदम रखेगी, उसे ‘लखपति’ बनाना हमारा प्रयास होगा। जहां तक लड़कियों के पोषण का सवाल है, यह जिम्मेदारी केवल उनके माता-पिता की नहीं है बल्कि यह सरकार की भी बराबर की जिम्मेदारी है।

मैं प्रसून जोशी का प्रशंसक क्यों हूं

जबसे मैंने आमिर खान की ”तारे जमीं पर” में प्रसून जोशी के गीत सुने हैं, मैं उनसे बहुत प्रभावित हूं। आजकल नारी शक्ति की लहर चल रही है, इसके संदर्भ में मैंने शुभा मुदगल की अलबम की एक वीडियो देखी, जिसमें प्रसून जी ने कुछ दिल को छू जाने वाले गीत लिखे हैं और उन्हें खुद प्रस्तुत भी किया है। इस गाने में लड़की अपने बाबुल से विनती करते हुए कहती है कि उसे कैसा वर चाहिए और कैसा नहीं चाहिए :

गाने के बोल कुछ इस प्रकार हैं :-

जिया मोरा घबराये बाबुल!
बिन बोले रहा ना जाए

शुरू के वाक्य के बोल हैं :

मुझे सुनार के घर न दीजियो
मोहे जेवर कभी ना भाये

उसी तरह वह अपने बाबुल से कहती है कि उसे किसी राजकुमार या व्यापारी से भी नहीं ब्याहना।

लड़की अपने अनुनय-विनय को समाप्त करती हुई एक अनोखा अनुरोध करती है

बाबुल मेरी इतनी अर्ज सुन लीजिए
मोहे लुहार के घर दे दीजिए
जो मेरी जंजीरें पिघलाए

बाबुल से की गई बेटी की यह प्रार्थना सुनने में थोड़ी अजीब भले ही लगे पर हमारे पुरूष प्रधान समाज में इसका विशेष महत्व है।



लाडली लक्ष्मी योजना : हम इसका राष्ट्रव्यापी कार्यान्वयन करेंगे और भारत की हर बच्ची को ”लखपति” बनायेंगे .

हाल ही में अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस (8 मार्च) के अवसर पर मेरी टीम ने जिस रचनात्मक तरीके से वेबसाइट पर शुभकामना संदेश दिया था, उसे लोगों ने काफी सराहा। सामान्य तौर पर दिखाए जाने वाले बैनर के बदले तीन स्क्रीन बारी-बारी से दिखाए गए। पहला, ‘नारी तुम श्रध्दा हो’ दूसरा ‘नारी तुम संस्कार हो’ और तीसरा ‘नारी तुम शक्ति हो’। यह विचार प्रसिध्द हिन्दी कवि श्री जयशंकर प्रसाद की कविता से प्रेरित था-

नारी! तुम केवल श्रध्दा हो,
विश्वास-रजत-नग पल तल में,
पीयूष श्रोत सी बहा करो
जीवन की सुन्दर समतल में

‘श्रध्दा’, ‘संस्कार’ और ‘शक्ति’ ये तीन शब्द नारी और विशेषकर भारतीय नारी के गुणों की बखूबी व्याख्या करते हैं। लेकिन फिर भी भारतीय नारी के विकास से जुड़े आंकड़ों को देखकर मुझे बहुत तकलीफ होती है।

• महिला के जीवन की संभावित औसत दर : 64.6 वर्ष
• शिशु मृत्यु दर : प्रति 1000 जीवित शिशुओं में 57 प्रतिशत
• 53 प्रतिशत महिलाओं ने किसी कुशल स्वास्थ्यकर्मी की मदद के बिना शिशुओं को जन्म दिया
• मातृ मृत्युदर : प्रति एक लाख बच्चों के जन्म पर 301
• एक लाख महिलाओं को तपेदिक के कारण घर से निकाला गया
• महिला साक्षरता दर : 47.8 प्रतिशत (विश्व में आखिरी पांचवा हिस्सा)
• 6 करोड़ अल्प कुपोषण वाले बच्चे और 80 लाख भयंकर कुपोषण से पीड़ित बच्चे (उनमें लड़कों की अपेक्षा लड़कियां ज्यादा)

मुझे जो बात सबसे ज्यादा परेशान करती है वह है - भारत में पुरूष और स्त्री के बीच जनसंख्या अन्तर, पुरूष (1000) और महिला (933)। यह स्थिति हरियाणा और पंजाब जैसे राज्यों में ज्यादा गंभीर है। प्रतिवर्ष लगभग 20 लाख कन्या भ्रूण वाली माताओं का गर्भपात करा दिया जाता है। हमारे यहां जन्म से पहले शिशु के लिंग की जांच करवाने के खिलाफ कड़े नियम हैं परन्तु सिर्फ कानून होना ही पर्याप्त नहीं है। पिछले वर्ष जब ”बेटी बचाओ” संस्था के कार्यकर्ता मुझसे मिले थे तो मैंने कहा था, ”भ्रूण हत्या जैसे घिनौने कृत्य के खिलाफ सरकारी एंव गैर-सरकारी संगठनों के प्रयासों को मिलाते हुए एक राष्ट्रीय अभियान चलाने की जरूरत है।” अगर भारतीय जनता पार्टी और एनडीए को आगामी लोकसभा चुनावों में जनादेश मिलता है तो मैं सरकार के मुखिया के नाते खुद इस अभियान का नेतृत्व करूंगा।

घरों में बालिकाओं के खिलाफ हो रहे भेदभाव का प्रमुख कारण गरीबी है। यही कारण है कि आज भी बालिकाओं की साक्षरता दर कम है और अधिकतर लड़कियां बीच में ही अपनी पढ़ाई छोड़ देती हैं। मैंने अपनी देशभर की यात्राओं के दौरान अक्सर छोटी उम्र की लड़कियों जिन्हें विद्यालयों में पढ़ते और खेलते हुए होना चाहिए, को लकड़ियों का बोझ सिर पर ढोते हुए देखा है। भारत सरकार एवं राज्य सरकारों की यह नैतिक र् कत्तव्य और लोकतांत्रिक जिम्मेदारी है कि वे नारी के खिलाफ इस असंतुलन को दूर करने और विकास के हर क्षेत्र में महिलाओं के विकास के लिए बराबर के अवसर उपलब्ध कराने के प्रयास करें।

इस सन्दर्भ में, मैं मध्य प्रदेश की भाजपा सरकार द्वारा 2006 में कार्यान्वित की गई ”लाडली लक्ष्मी योजना” की सराहना करता हूं। यह योजना बहुत ही कम समय में मध्य प्रदेश राज्य के इतिहास में अत्यधिक सफल समाज कल्याण् योजनाओं में से एक सिध्द हुई है। इसका श्रेय मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान को जाता है जिनकी राजनीतिक इच्छा-शक्ति और लगातार निजी ध्यान देने से ही यह संभव हो पाया है। ”लाडली लक्ष्मी योजना” का मुख्य उद्देश्य है-लड़कियों का विद्यालयों से नाम कटवाने की प्रवृत्ति को बंद करना और उन्हें कम से कम कॉलेज में जाने से पूर्व तक की पढ़ाई पूरी करने के लिए प्रोत्साहित करना। इस योजना के अन्तर्गत राज्य सरकार परिवार में पैदा हुई हर लड़की के लिए पांच वर्ष तक प्रतिवर्ष 6000 रूपये के बचत-पत्र (Saving Certificate) खरीदती है। पांचवी कक्षा की पढ़ाई पूरी करने के उपरान्त लड़की को 2000 रूपये, आठवीं कक्षा पूरी करने पर 4,000 रूपये और दसवीं कक्षा के बाद 7500 रूपये दिए जाते हैं। ग्यारहवीं कक्षा के दौरान छात्रा को प्रति मास 200 रूपये की राशि दी जाती है; और बारहवीं कक्षा में प्रवेश लेने पर अथवा 18 वर्ष की आयु पूरी करने पर उसे 1,18,000 रूपये की एकमुश्त रकम दी जाती है।

मेरा यह वादा है कि यदि एनडीए को सरकार बनाने का जनादेश मिलता है तो हम हर राज्य में ”लाडली लक्ष्मी योजना” को कार्यान्वित करेंगे। भारत में हर लाडली जब बालिग बनेगी और जीवन के नये चरण में कदम रखेगी, उसे ‘लखपति’ बनाना हमारा प्रयास होगा। जहां तक लड़कियों के पोषण का सवाल है, यह जिम्मेदारी केवल उनके माता-पिता की नहीं है बल्कि यह सरकार की भी बराबर की जिम्मेदारी है।

मैं प्रसून जोशी का प्रशंसक क्यों हूं

जबसे मैंने आमिर खान की ”तारे जमीं पर” में प्रसून जोशी के गीत सुने हैं, मैं उनसे बहुत प्रभावित हूं। आजकल नारी शक्ति की लहर चल रही है, इसके संदर्भ में मैंने शुभा मुदगल की अलबम की एक वीडियो देखी, जिसमें प्रसून जी ने कुछ दिल को छू जाने वाले गीत लिखे हैं और उन्हें खुद प्रस्तुत भी किया है। इस गाने में लड़की अपने बाबुल से विनती करते हुए कहती है कि उसे कैसा वर चाहिए और कैसा नहीं चाहिए :

गाने के बोल कुछ इस प्रकार हैं :-

जिया मोरा घबराये बाबुल!
बिन बोले रहा ना जाए

शुरू के वाक्य के बोल हैं :

मुझे सुनार के घर न दीजियो
मोहे जेवर कभी ना भाये

उसी तरह वह अपने बाबुल से कहती है कि उसे किसी राजकुमार या व्यापारी से भी नहीं ब्याहना।

लड़की अपने अनुनय-विनय को समाप्त करती हुई एक अनोखा अनुरोध करती है

बाबुल मेरी इतनी अर्ज सुन लीजिए
मोहे लुहार के घर दे दीजिए
जो मेरी जंजीरें पिघलाए

बाबुल से की गई बेटी की यह प्रार्थना सुनने में थोड़ी अजीब भले ही लगे पर हमारे पुरूष प्रधान समाज में इसका विशेष महत्व है।

गुजरात कैसे ‘जीवन्त’ (वॉयब्रेंट) बना ?



गुजरात कैसे ‘जीवन्त’ (वॉयब्रेंट) बना ?

मकर संक्रांति (14 जनवरी) हमारे देश के विभिन्न भागों में अलग-अलग नामों से जानी जाती है। तमिलनाडु में यह त्योहार पोंगल के नाम से मनाया जाता है। असम में यह बीहू के नाम से गीत, नृत्य और हर्षोंल्लास के साथ मनाया जाता है। पंजाब और उत्तर भारत के कई भागों में यह त्योहार एक या दो दिन पहले मनाया जाता है। जिसे लोग लोहड़ी कहते हैं। ठंडी रात के समय लोग इकट्ठे होकर लकड़ियों के ढेर बनाकर उसे जलाते हैं, लोहड़ी के गीत गाते हैं, रेवड़ी, मूंगफली, पॉपकॉर्न और तिल की बनी मिठाईयां आपस में बांटते हैं। प्रति वर्ष मेरा परिवार लोहड़ी का त्योहार अपने आवास पर दोस्तों, कार्यालय के सहयोगियों और सुरक्षाकर्मियों के साथ बड़े आनन्द के साथ मनाता है।

मकर संक्रांति मुझे गुजरात, जहां से मैं संसद में प्रतिनिधित्व करता हूं, के पतंग उत्सव की याद दिलाती है। इस दिन अहमदाबाद और राज्य के दूसरे शहरों और कस्बों के ऊपर गहरे नीले आकाश में एक कैनवास सा बन जाता है क्योंकि लाखों लोग अपने घरों की छतों पर चढ़कर भिन्न-भिन्न रंगों की पतंग उड़ाते हुए पतंग उत्सव का आनन्द उठाते हैं और यह वास्तव में, गुजरात में यह अन्तर्राष्ट्रीय पतंग उत्सव सैलानियों के आकर्षण का प्रमुख केन्द्र बन गया है।

वर्ष 2003 से वॉयब्रेंट (जीवन्त) शब्द गुजरात से जुड़ गया है। दूसरे मायने में इसमें राष्ट्रीय और अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर राज्य की प्रतिष्ठा भी बढ़ाई है। इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए कि चालू वर्ष की आर्थिक मंदी में भी दो-दिवसीय वॉयब्रेंट गुजरात वैश्विक निवेशक सम्मेलन (Two-day vibrant gujarat global investors’ summit 2009) जो 13 जनवरी को अहमदाबाद में समाप्त हुआ, ने 12 लाख करोड़ रूपये से अधिक के निवेश आकर्षित किए। राज्य सरकार और भावी निवेशकों के बीच 8,500 से अधिक समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए गए। इनसे 25 लाख से ज्यादा अतिरिक्त रोजगार का सृजन होने की संभावना है। यद्यपि वर्ष 2003, 2005 और 2007 में हुए ”वॉयब्रेंट गुजरात” सम्मेलन के पिछले तीन आयोजनों में कुल मिलाकर 6.34 लाख करोड़ रूपये से अधिक के निवेश के वादे प्राप्त हुए जबकि वर्ष 2009 के अकेले सम्मेलन में 12 लाख करोड़ रूपये के निवेश हेतु समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए गए।

जैसी कि ‘द हिन्दू’ समाचार पत्र में रिपोर्ट प्रकाशित हुई है :

”देश और विदेश के प्रमुख उद्योगपतियों तथा विदेशी प्रतिनिधिमंडलों ने भी श्री नरेन्द्र मोदी को, ऐसे समय पर जब विश्व अर्थव्यवस्था मंदी के दौर से गुजर रही है, औद्योगिक निवेश आकृष्ट करने में राज्य की उपलब्धि के लिए साधुवाद देते हुए करतल ध्वनि से मुख्यमंत्री की घोषणा का स्वागत किया।”

वॉयब्रेंट गुजरात 2009

जब श्री नरेन्द्र मोदी ने दिसम्बर, 2007 में
राज्य विधानसभा चुनावों में जबरदस्त जीत
हासिल करने के बाद गुजरात के मुख्यमंत्री
के रूप में शपथ ली थी, उस समय
श्री लालकृष्ण आडवाणी, भारतीय जनता पार्टी
के अध्यक्ष श्री राजनाथ सिंह और श्री नरेन्द्र मोदी
का एक फाइल फोटोग्राफ।

नरेन्द्र भाई की सफलता का राज क्या है? सीधा सा उत्तर है : उन्होंने भारतीय जनता पार्टी की प्रतिबध्दता सुशासन, विकास और सुरक्षा का अनुकरण किया है।

गुजरात ने देश में न केवल सबसे तीव्र आर्थिक विकास किया है बल्कि इसने सामाजिक विकास में भी जबरदस्त सफलताएं हासिल की हैं। राज्य के कई हिस्सों में पेयजल की भारी और चिरस्थायी समस्या को बड़े पैमाने पर हल कर लिया है। ‘ज्योतिग्राम योजना’ जिसको व्यापक सराहना मिली है, ने राज्य के सभी गांवों और बस्तियों में 24 घण्टे और सातों दिन बिजली मुहैया करने में सफलता प्राप्त की है। आदिवासी क्षेत्रों सहित बीच में स्कूल छोड़ने वाले बच्चों की दर में कमी आई है। गुजरात स्लम सुधार और शहरी नवीकरण में आगे है।

जिस बात से मुझे विशेष संतुष्टि होती है वह यह है कि गुजरात ने जिस ढंग से राजनीतिक और अफसरशाही में व्याप्त भ्रष्टाचार को कम करने में सफलता हासिल की है, वह अन्य सरकारों के लिए वास्तव में एक आदर्श है। दिसम्बर 2007 में गुजरात विधानसभा चुनावों में नया जनादेश हासिल करने में भारतीय जनता पार्टी की सफलता के बाद मैंने निम्नलिखित टिप्पणी की थी :

”कांग्रेस और इसके छदम्-धर्मनिरपेक्षता के समर्थक इन चुनावों को एक तरह से साम्प्रदायिकता बनाम धर्मनिरपेक्षता के आधार पर राष्ट्रीय जनमत संग्रह में परिवर्तित करना चाहते थे। कहने की जरूरत नहीं है कि वे अपने इरादों में बुरी तरह से विफल रहे।”

मैं एक अन्य कारण से गुजरात चुनावों के परिणाम को महत्वपूर्ण मानता हूं। इससे पता चलता है कि किस तरह से एक निष्ठावान, साहसी एवं समर्थ नेता जनता के समर्थन से दुष्प्रचार के अभियान को पराभूत कर सकता है। मैंने पिछले 60 वर्षों के दौरान भारतीय राजनीति में ऐसा कोई नेता नहीं देखा, जिसे राष्ट्रीय और अन्तर्राष्ट्रीय दोनों स्तरों पर निरन्तर इतने घृणित तथा अनैतिक रूप से बदनाम किया गया हो, जितना श्री मोदी को सन् 2002 से। श्रीमती सोनिया गांधी ने तो सारी मर्यादा तोड़कर उन्हें ”मौत का सौदागर” तक कह दिया। मुझे प्रसन्नता है कि गुजरात के लोगों ने ऐसी विषैली राजनीति करने वालों को सटीक उत्तर दिया।

मुझे यह देखकर हंसी आती है कि इन दिनों भारतीय जनता पार्टी का विरोध करने वाले मीडिया के कुछ वर्ग ‘वॉयब्रेंट गुजरात’ सम्मेलन में भी भारतीय जनता पार्टी में कथित मतभेदों के प्रमाण ढूंढने में कड़ी मेहनत कर रहे हैं।

मैं केवल उस बात की याद दिला सकता हूं जो मैंने गुजरात विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी को मिली जबरदस्त विजय के कुछ समय बाद नई दिल्ली में प्रेस सम्मेलन को सम्बोधित करते हुए कही थी।

एक महिला पत्रकार ने मुझसे प्रश्न किया, ”क्या आप नहीं सोचते कि नरेन्द्र भाई का अब पार्टी से भी ऊंचा कद हो गया है? उनके प्रश्न का मैंने यह उत्तर दिया था, ”यह अक्सर परिवार में होता है कि घर का एक छोटा सदस्य ऐसी कोई उपलब्धि हासिल करता है जो पहले किसी ने हासिल नहीं की हो तो उस पर पूरे परिवार को गर्व होता है। परिवार कभी भी उस बारे में अपने आपको कम महत्व वाला नहीं समझता।”